Category Archives: ज्योतिष

जन्म कुंडली के 12 भाव

जन्म कुंडली के 12 भाव

1 भाव सबसे मजबूत होना चाहिए यह उस शरीर का प्रतिनिधित्व करता है जिसे आप अपने शारीरिक बनावट, और अपने सामान्य स्वभाव के साथ पैदा हुए थे। फर्स्ट हाउस पर कब्जा करने वाले नेटल ग्रह उस व्यक्ति के जीवन में बहुत मजबूत प्रभाव डालते हैंl यह चक्र का पहला पड़ाव है, जब आकाश में ग्रह…..

नव रत्न सामान्य तौर पर ग्राहों-नक्षत्रों के अनुसार पहने जाते हैं

नव रत्न सामान्य तौर पर ग्राहों-नक्षत्रों के अनुसार पहने जाते हैं

ज्योतिष में मात्र नवरत्नों को ही लिया जाता है।इन रत्नों के उपलब्ध न होने पर इनके उपरत्न या समान प्रभावकारी रत्नों का प्रयोग किया जाता है। भारतीय मान्यता के अनुसार कुल 84 रत्न पाए जाते हैं, जिनमें माणिक्य, हीरा, मोती, नीलम, पन्ना, मूँगा, गोमेद, तथा वैदूर्य (लहसुनिया) को नवरत्न माना गया है। ये रत्न ही…..

मीन लग्‍न में कौन सा रत्न धारण करना चाहिए

मीन लग्‍न में कौन सा रत्न धारण करना चाहिए मीन लग्‍न में मन का स्‍वामी चंद्रमा पंचम भाव का स्‍वामी होकर माता, भूमि भवन, वाहन, चतुष्पद, मित्र, साझेदारी, शांति, जल, जनता, स्थायी संपति, दया, परोपकार, कपट, छल, अंतकरण की स्थिति, जलीय पदार्थो का सेवन, संचित धन, झूंठा आरोप, अफ़वाह, प्रेम, प्रेम संबंध, प्रेम विवाह इत्यादि…..

लाजवंत आप इसे लाजवर्त

लाजवंत आप इसे लाजवर्त भी कहते हैं यह एक नीले रंग का चमकदार धब्बा से युक्त रत्न है जो किसी राशि अथवा ग्रह से विशेष संबंधित नहीं है लाजवर्त अफगानिस्तान में पर्याप्त मात्रा में पाया जाने वाला एक के चमत्कारी रत्न है जिसे हम भूत प्रेत जादू टोना मानसिक अशांति रोग अथवा काम में आ रही…..

लग्न का अर्थ कुंडली का प्रथम भाव

लग्न का अर्थ कुंडली का प्रथम भाव

अगर – लग्न में 1 नंबर लिखा होगा तो मेष लग्न, लग्न में 2 नंबर लिखा होगा तो वृष लग्न, लग्न में 3 नंबर लिखा होगा तो मिथुन लग्न, लग्न में 4 नंबर लिखा होगा तो कर्क लग्न, लग्न में 5 नंबर लिखा होगा तो सिंह लग्न, लग्न में 6 नंबर लिखा होगा तो कन्या…..

लक्ष्मी योग और ज्योतिष

लक्ष्मी योग और ज्योतिष

इस भौतिक मानवीय जीवन में से लक्ष्मी का प्रभुत्व छोड़दें तो शेष रह जाता है शून्य। लक्ष्मी है कि चिर युवा व चंचला होने के कारण एक जगह टिकती ही नहीं है। चाणक्य ने ठीक ही कहा है कि निर्धनता आज के युग का सबसे बड़ा अभिशाप है। कैसी विचित्र सिथिति है कि शुक्र दैत्य…..

राशि के अनुसार रंगो का उपयोग

राशि के अनुसार रंगो का उपयोग

ग्रह दोष दूर करने के लिए रंगो का ,रुमाल ,बेड कवर, चादर, कपड़े, गहने, पर्दे ,पर्स, वस्त्र पहनें , घर की सजावट में ,महिलाएँ इन रंगों की बिंदी ,सोफा कवर या पिलो कवर,सफलता ,होली मे रंग आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं.राशि के अनुसार रंगो का उपयोग किया जाए तो धन संबंधी शुभ फल प्राप्त…..

मेष लग्न मूंगा

मेष लग्‍न में सूर्य पांचवें भाव का स्‍वामी होता है  मेष लग्‍न में सूर्य पांचवें भाव का स्‍वामी होता है और लग्‍नेश मंगल का मित्र होता है।   इस स्‍थ‍िति में बौद्धिक क्षमता में वृद्धि, संतान-सुख और राजकृपा प्राप्‍त करने के लिए माणिक्‍य पहन सकते हैं। यहां सूर्य की महादशा में भी माणिक धारण किया जाता…..

मूंगा मंगल ग्रह का रत्न

ग्रहों के सेनापति मंगल का रत्न मूंगा है। इस रत्न को तब धारण करना चाहिए जबकि कुण्डली में मंगल शुभ भाव का स्वामी हो कर स्थित हो। इस स्थिति में मंगल की शुभता में वृद्धि होती है और व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर मंगल कुण्डली में अस्त अथवा पीड़ित हो तब भी मूंगा धारण…..

पारद शिवलिंग

पारद शिवलिंग

पारद शिवलिंग पूजन वैदिक रीतियों में, पूजन विधि में, समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति में पारद से बने शिवलिंग एवं अन्य आकृतियों का विशेष महत्त्व होता है। पारद जिसे अंग्रेजी में एलम (Alum) भी कहते हैं , एक तरल पदार्थ होता है और इसे ठोस रूप में लाने के लिए विभिन्न अन्य धातुओं जैसे कि स्वर्ण,…..